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Zamindoz
352.00
| SKU Code | Book2302736C |
| ISBN | 9788167453327 |
| Pages | 184 |
| Language | Hindi |
| Genre | General Non-Fiction |
| Book Type | Paperback |
| Book Size | 6*9 |
| Published Date | 24 October, 2026 |
Synopsis
"ज़मींदोज़ - मैसिना की आख़िरी सुबह
28 दिसम्बर 1908... इटली के मैसिना की वह सुबह, जो इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई। एक शांत शहर ने अभी सूरज की पहली किरणों का स्वागत ही किया था कि धरती ऐसी कौंपी, मानो कयामत ने दस्तक दे दी हो। पल भर में आलीशान इमारतें मलबे में बदल गई और हजारों जिंदगियों हमेशा के लिए खामोश हो गई।
मगर मौत का यह सिलसिला यही नहीं रुका समुद्र पीछे हटा और फिर एक स्वौफनाक सुनामी बनकर पूरे शहर पर टूट पड़ा। चारों तरफ चीखें, बिखरे रिश्ते, उजड़े घर और अपनों को तलाशती वेबस आँखें थी। इसी मातम और तबाही के बीच एक भारतीय परिवार जिंदगी बचाने की ऐसी जद्दोजहद में फंस जाता है, जहाँ हर पल मौत सामने खड़ी है और हर साँस जिंदगी की आखिरी उम्मीद।
दूर-दराज से आए जहाज, रूसी नाविकों का अदम्य साहस और अनजान इंसानों की बेभर्ज इंसानियत मलबे के बीच उम्मीद की एक लौ जलाती है।
""जमींदोज़"" महज भूकंप और सुनामी की दास्तान नहीं यह दर्द, बिछड़ने, साहस, प्रेम और उस इंसानियत की कहानी है, जो कयामत जैसी तबाही के बीच भी जिंदा रहती है।
एक ऐसी सुबह की कहानी, जिसने मैसिना को जमींदोज कर दिया... मगर इंसानियत को नहीं।"
28 दिसम्बर 1908... इटली के मैसिना की वह सुबह, जो इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई। एक शांत शहर ने अभी सूरज की पहली किरणों का स्वागत ही किया था कि धरती ऐसी कौंपी, मानो कयामत ने दस्तक दे दी हो। पल भर में आलीशान इमारतें मलबे में बदल गई और हजारों जिंदगियों हमेशा के लिए खामोश हो गई।
मगर मौत का यह सिलसिला यही नहीं रुका समुद्र पीछे हटा और फिर एक स्वौफनाक सुनामी बनकर पूरे शहर पर टूट पड़ा। चारों तरफ चीखें, बिखरे रिश्ते, उजड़े घर और अपनों को तलाशती वेबस आँखें थी। इसी मातम और तबाही के बीच एक भारतीय परिवार जिंदगी बचाने की ऐसी जद्दोजहद में फंस जाता है, जहाँ हर पल मौत सामने खड़ी है और हर साँस जिंदगी की आखिरी उम्मीद।
दूर-दराज से आए जहाज, रूसी नाविकों का अदम्य साहस और अनजान इंसानों की बेभर्ज इंसानियत मलबे के बीच उम्मीद की एक लौ जलाती है।
""जमींदोज़"" महज भूकंप और सुनामी की दास्तान नहीं यह दर्द, बिछड़ने, साहस, प्रेम और उस इंसानियत की कहानी है, जो कयामत जैसी तबाही के बीच भी जिंदा रहती है।
एक ऐसी सुबह की कहानी, जिसने मैसिना को जमींदोज कर दिया... मगर इंसानियत को नहीं।"
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