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Anand Kumar Srivastava
"इलाहाबाद की मिट्टी की सौथी महक, गंगा जमुनी तहजीब की स्वाली और अदब की खुशबू के दरमियान एक नाम स्वामोशी से अपनी पहचान बनाता रहा आनन्द कुमार श्रीवास्तव।
उनकी लेखनी में इतिहास की गहराई है, संस्कृति की सौथी महक है और इंसानी रिश्तों की मर्माहट भी। लेखक का पूर्व प्रकाशित उपन्यास ""आरक्षणः एक अधूरी आजादी पालकों के बीच अपनी जगह बना चुका है और उसी साहित्यिक सफर को आगे बढ़ाते हुए लेखक ने इस बार इतिहास के एक ऐसे दर्दनाक अध्याय को अपनी कलम का विषय बनाया है, जिसकी गूँज आज भी इंसानी जेहन में महसूस की जा सकती है।"
Debut Work: "ज़मींदोज़ – मैसिना की आख़िरी सुबह"