Available
Khyala Da Shehar
By Deep Shayar
399.00
| SKU Code | Book2302485C |
| ISBN | 9788167451613 |
| Pages | 252 |
| Language | Hindi |
| Genre | Poetry |
| Book Type | Paperback |
| Book Size | 5*8 |
| Published Date | 28 September, 2026 |
Synopsis
"कहते हैं, हर इंसान के भीतर एक शहर बसता है— जहाँ कुछ लोग उम्रभर रहते हैं, कुछ याद बनकर गुजर जाते हैं, और कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें हम खो देने के बाद भी अपने ख़यालों से कभी जाने नहीं देते।
'ख्याला दा शहर’ उसी शहर की कहानी है— जहाँ इश्क़ है, इंतज़ार है, मोहब्बत है, बिछड़ना है,कुछ अनकहे सवाल हैं और कुछ ऐसे जवाब,जो शायद सिर्फ़ ख़ामोशी समझती है। यह किताब पढ़ते हुए शायद आपको किसी किरदार में अपना अक्स दिखाई दे, किसी पन्ने पर कोई पुरानी याद ठहर जाए,
और किसी शायरी में वह बात मिल जाए जो आप बरसों से किसी से कहना चाहते थे। लेकिन कभी कह नहीं पाये या फिर कभी हिम्मत नहीं हुई, बस इसी को सोच कर मैं ये लिखता चला गया कि शायद कोई तो होगा जो मेरी तरह सोच रखता होगा । कि लिखते वक़्त सामने दिल खोलकर रखना पड़ता है।क्योंकि कुछ कहानियाँ पढ़ी नहीं जातीं… वे दिल में उतरती हैं, और फिर वहीं रहने लगती हैं ।
दीप — एक ऐसा नाम, जिसने शब्दों को सिर्फ़ लिखा नहीं, बल्कि उन्हें महसूस किया है। गीतों से लेकर कविताओं तक, शायरी से लेकर कहानियों तक, दीप ने उन एहसासों को अपनी कलम का रास्ता दिया है जिन्हें इंसान अक्सर अपने भीतर ही रख लेता है—कुछ कह नहीं पाता, कुछ कहने से डरता है और कुछ कहने के लिए सही शब्द नहीं मिलते।
‘ख्याला दा शहर’ मेरी पहली प्रकाशित पुस्तक है, लेकिन मेरे ख़यालों का सफ़र इससे कहीं पहले शुरू हो चुका था। इस किताब में उन्हीं ख़ामोश एहसासों, अनकही बातों और भीतर बसे किरदारों को शब्द मिले हैं। यह किताब मेरे लिए केवल एक शुरुआत नहीं, बल्कि उस सफ़र का पहला मुकाम है जहाँ दिल की बात कलम कहती है और ख़ामोशी एक कहानी बन जाती है।
शायद इसलिए ‘ख्याला दा शहर’ सिर्फ़ एक किताब नहीं—
उन तमाम बातों का पता है,
जो हम कहना तो चाहते हैं…
मगर कह नहीं पाते।"
'ख्याला दा शहर’ उसी शहर की कहानी है— जहाँ इश्क़ है, इंतज़ार है, मोहब्बत है, बिछड़ना है,कुछ अनकहे सवाल हैं और कुछ ऐसे जवाब,जो शायद सिर्फ़ ख़ामोशी समझती है। यह किताब पढ़ते हुए शायद आपको किसी किरदार में अपना अक्स दिखाई दे, किसी पन्ने पर कोई पुरानी याद ठहर जाए,
और किसी शायरी में वह बात मिल जाए जो आप बरसों से किसी से कहना चाहते थे। लेकिन कभी कह नहीं पाये या फिर कभी हिम्मत नहीं हुई, बस इसी को सोच कर मैं ये लिखता चला गया कि शायद कोई तो होगा जो मेरी तरह सोच रखता होगा । कि लिखते वक़्त सामने दिल खोलकर रखना पड़ता है।क्योंकि कुछ कहानियाँ पढ़ी नहीं जातीं… वे दिल में उतरती हैं, और फिर वहीं रहने लगती हैं ।
दीप — एक ऐसा नाम, जिसने शब्दों को सिर्फ़ लिखा नहीं, बल्कि उन्हें महसूस किया है। गीतों से लेकर कविताओं तक, शायरी से लेकर कहानियों तक, दीप ने उन एहसासों को अपनी कलम का रास्ता दिया है जिन्हें इंसान अक्सर अपने भीतर ही रख लेता है—कुछ कह नहीं पाता, कुछ कहने से डरता है और कुछ कहने के लिए सही शब्द नहीं मिलते।
‘ख्याला दा शहर’ मेरी पहली प्रकाशित पुस्तक है, लेकिन मेरे ख़यालों का सफ़र इससे कहीं पहले शुरू हो चुका था। इस किताब में उन्हीं ख़ामोश एहसासों, अनकही बातों और भीतर बसे किरदारों को शब्द मिले हैं। यह किताब मेरे लिए केवल एक शुरुआत नहीं, बल्कि उस सफ़र का पहला मुकाम है जहाँ दिल की बात कलम कहती है और ख़ामोशी एक कहानी बन जाती है।
शायद इसलिए ‘ख्याला दा शहर’ सिर्फ़ एक किताब नहीं—
उन तमाम बातों का पता है,
जो हम कहना तो चाहते हैं…
मगर कह नहीं पाते।"
Reader Reviews (0)
No reviews yet. Be the first to write one!
Share Your Thoughts
Your personal identity metrics remain protected inside our system parameters.