Deep Shayar
"दीप, एक ऐसा नाम, जिसने शब्दों को सिर्फ लिखा नहीं, बल्कि उन्हें महसूस किया है। गीतों से लेकर कविताओं तक, शायरी से लेकर कहानियों तक, हाँ मैंने न उन एहसासों को अपनी कलम का रास्ता दिया है जिन्हें इंसान अक्सर अपने भीतर ही रख लेता है-कुछ कह नहीं पाता, कुछ कहने से डरता है और कुछ कहने के लिए सही शब्द नहीं मिलते।
'ख्याला दा शहर' मेरी पहली प्रकाशित पुस्तक है. लेकिन मेरे खयालों का सफर इससे कहीं पहले शुरू हो चुका था। इस किताब में उन्हीं खामोश एहसासों, अनकही बातों और भीत्तर बसे किरदारों को शब्द मिले हैं।
यह किताब मेरे लिए केवल एक शुरुआत नहीं, बल्कि उस सफर का पहला मुकाम है जहाँ दिल की बात कलम कहती है और खामोशी एक कहानी बन जाती है।
शायद इसलिए 'ख्याला दा शहर' सिर्फ एक किताब नहीं- उन तमाम बातों का पता है, जो हम कहना तो चाहते हैं... मगर कह नहीं पाते।"