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उत्तर की बहू
231.00
| SKU Code | Book2302222C |
| ISBN | 9788169683869 |
| Pages | 124 |
| Language | Hindi |
| Genre | Contemporary Fiction |
| Book Type | Paperback |
| Book Size | 5*8 |
| Published Date | 05 August, 2026 |
Synopsis
"उत्तर की बहू
एक घर, अनेक रिश्ते, अनगिनत जिम्मेदारियाँ और उन सबके बीच अपने अस्तित्व को खोजती एक स्त्री...
सुनीता जब बहू बनकर अपने नए घर में प्रवेश करती है, तो उसके साथ आते हैं सपने, उम्मीदें और एक बेहतर भविष्य की कल्पनाएँ। लेकिन परंपराओं, सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच उसका जीवन धीरे-धीरे एक ऐसे संघर्ष में बदल जाता है, जहाँ उसे अपने कर्तव्यों और अपने अस्तित्व के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
""उत्तर की बहू"" केवल सुनीता की कहानी नहीं है; यह उन लाखों भारतीय स्त्रियों की कथा है, जिन्होंने परिवार की खुशियों के लिए अपने सपनों का त्याग किया, फिर भी धैर्य, प्रेम और साहस के साथ जीवन की हर चुनौती का सामना किया। यह उपन्यास स्त्री के आत्मसम्मान, शिक्षा, अधिकार और बदलते सामाजिक मूल्यों की संवेदनशील पड़ताल करता है।
संघर्ष, संवेदना, रिश्तों की ऊष्मा और परिवर्तन की धीमी लेकिन सशक्त यात्रा से बुनी यह कथा पाठकों के हृदय को छू लेगी और उन्हें सोचने पर विवश करेगी कि समाज की वास्तविक प्रगति स्त्री के सम्मान और समानता से ही संभव है।
""यह कहानी आँसुओं की है, पर हार की नहीं; यह संघर्ष की है, पर आशा के साथ।"""
एक घर, अनेक रिश्ते, अनगिनत जिम्मेदारियाँ और उन सबके बीच अपने अस्तित्व को खोजती एक स्त्री...
सुनीता जब बहू बनकर अपने नए घर में प्रवेश करती है, तो उसके साथ आते हैं सपने, उम्मीदें और एक बेहतर भविष्य की कल्पनाएँ। लेकिन परंपराओं, सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच उसका जीवन धीरे-धीरे एक ऐसे संघर्ष में बदल जाता है, जहाँ उसे अपने कर्तव्यों और अपने अस्तित्व के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
""उत्तर की बहू"" केवल सुनीता की कहानी नहीं है; यह उन लाखों भारतीय स्त्रियों की कथा है, जिन्होंने परिवार की खुशियों के लिए अपने सपनों का त्याग किया, फिर भी धैर्य, प्रेम और साहस के साथ जीवन की हर चुनौती का सामना किया। यह उपन्यास स्त्री के आत्मसम्मान, शिक्षा, अधिकार और बदलते सामाजिक मूल्यों की संवेदनशील पड़ताल करता है।
संघर्ष, संवेदना, रिश्तों की ऊष्मा और परिवर्तन की धीमी लेकिन सशक्त यात्रा से बुनी यह कथा पाठकों के हृदय को छू लेगी और उन्हें सोचने पर विवश करेगी कि समाज की वास्तविक प्रगति स्त्री के सम्मान और समानता से ही संभव है।
""यह कहानी आँसुओं की है, पर हार की नहीं; यह संघर्ष की है, पर आशा के साथ।"""
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