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THE KING IN YELLOW (द किंग इन येलो- Hindi Translation)
By "Author Robert W. Chambers Translator Sadik Iqbal Siddiqui"
549.00
| SKU Code | Book2302681C |
| ISBN | 9788167452696 |
| Pages | 254 |
| Language | Hindi |
| Genre | Supernatural Horror |
| Book Type | Paperback |
| Book Size | 6*9 |
| Published Date | 02 October, 2026 |
Synopsis
"THE KING IN YELLOW
पुस्तक के बारे में◆
1895 में पहली बार प्रकाशित रॉबर्ट डब्ल्यू. चेम्बर्स की ‘द किंग इन येलो’ दस कहानियों का एक अनोखा संग्रह है, जिसने गोथिक हॉरर और ‘वियर्ड फ़िक्शन’ की परंपरा में अपनी अलग पहचान बनाई। इसकी शुरुआती कहानियाँ एक रहस्यमय, निषिद्ध नाटक—‘द किंग इन येलो’—की छाया से जुड़ती हैं; ऐसा नाटक जिसे पढ़ना मानो वास्तविकता, स्मृति और विवेक की सीमाओं को अस्थिर कर देता है।
कार्कोसा, येलो साइन और पीले वस्त्रों में छिपे रहस्यमय राजा की झलकें पाठक के सामने पूरी तरह खुलती नहीं हैं। चेम्बर्स भय को प्रत्यक्ष दिखाने के बजाय संकेतों, अधूरी सूचनाओं, स्वप्न-जैसे दृश्यों और बढ़ती हुई बेचैनी के माध्यम से रचते हैं। यही अस्पष्टता इन कहानियों को एक ऐसा मनोवैज्ञानिक असर देती है जो कहानी समाप्त होने के बाद भी बना रहता है।
संग्रह की पहली चार कहानियाँ विशेष रूप से उस काल्पनिक नाटक और उससे जुड़े प्रतीकों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। इसके बाद पुस्तक का स्वर धीरे-धीरे बदलता है और पाठक को रहस्य, रोमांस, कला-जगत और उन्नीसवीं सदी के पेरिस की बोहेमियन दुनिया की ओर ले जाता है। इस कारण ‘द किंग इन येलो’ केवल हॉरर-संग्रह नहीं, बल्कि वातावरण, कल्पना और मानवीय मन की बदलती अवस्थाओं का भी साहित्यिक अनुभव है।
आज यह पुस्तक गोथिक साहित्य, अलौकिक रहस्य, मनोवैज्ञानिक भय और क्लासिक हॉरर के पाठकों के लिए विशेष महत्व रखती है। इसका प्रभाव बाद की वियर्ड और कॉस्मिक हॉरर परंपराओं तक महसूस किया गया, जबकि कार्कोसा और येलो साइन जैसे प्रतीक आधुनिक लोकप्रिय संस्कृति में भी बार-बार लौटते रहे हैं।
एक ऐसी दुनिया, जहाँ सबसे भयावह चीज़ वह हो सकती है जिसे लेखक पूरी तरह दिखाता ही नहीं।"
पुस्तक के बारे में◆
1895 में पहली बार प्रकाशित रॉबर्ट डब्ल्यू. चेम्बर्स की ‘द किंग इन येलो’ दस कहानियों का एक अनोखा संग्रह है, जिसने गोथिक हॉरर और ‘वियर्ड फ़िक्शन’ की परंपरा में अपनी अलग पहचान बनाई। इसकी शुरुआती कहानियाँ एक रहस्यमय, निषिद्ध नाटक—‘द किंग इन येलो’—की छाया से जुड़ती हैं; ऐसा नाटक जिसे पढ़ना मानो वास्तविकता, स्मृति और विवेक की सीमाओं को अस्थिर कर देता है।
कार्कोसा, येलो साइन और पीले वस्त्रों में छिपे रहस्यमय राजा की झलकें पाठक के सामने पूरी तरह खुलती नहीं हैं। चेम्बर्स भय को प्रत्यक्ष दिखाने के बजाय संकेतों, अधूरी सूचनाओं, स्वप्न-जैसे दृश्यों और बढ़ती हुई बेचैनी के माध्यम से रचते हैं। यही अस्पष्टता इन कहानियों को एक ऐसा मनोवैज्ञानिक असर देती है जो कहानी समाप्त होने के बाद भी बना रहता है।
संग्रह की पहली चार कहानियाँ विशेष रूप से उस काल्पनिक नाटक और उससे जुड़े प्रतीकों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। इसके बाद पुस्तक का स्वर धीरे-धीरे बदलता है और पाठक को रहस्य, रोमांस, कला-जगत और उन्नीसवीं सदी के पेरिस की बोहेमियन दुनिया की ओर ले जाता है। इस कारण ‘द किंग इन येलो’ केवल हॉरर-संग्रह नहीं, बल्कि वातावरण, कल्पना और मानवीय मन की बदलती अवस्थाओं का भी साहित्यिक अनुभव है।
आज यह पुस्तक गोथिक साहित्य, अलौकिक रहस्य, मनोवैज्ञानिक भय और क्लासिक हॉरर के पाठकों के लिए विशेष महत्व रखती है। इसका प्रभाव बाद की वियर्ड और कॉस्मिक हॉरर परंपराओं तक महसूस किया गया, जबकि कार्कोसा और येलो साइन जैसे प्रतीक आधुनिक लोकप्रिय संस्कृति में भी बार-बार लौटते रहे हैं।
एक ऐसी दुनिया, जहाँ सबसे भयावह चीज़ वह हो सकती है जिसे लेखक पूरी तरह दिखाता ही नहीं।"
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