Available
Khushiyon Ka Pata
253.00
| SKU Code | Book2302620C |
| ISBN | 9788167452290 |
| Pages | 136 |
| Language | Hindi |
| Genre | General Fiction |
| Book Type | Paperback |
| Book Size | 5.5x8.5 |
| Published Date | 05 October, 2026 |
Synopsis
"क्या सचमुच पहले के लोग अधिक खुश थे?
जब गाँव में कच्चे घर थे, आमदनी कम थी, बिजली कभी-कभी आती थी,
और जीवन सुविधाओं से बहुत दूर था...तब लोग फिर भी हँसते थे, साथ
बैठते थे और मन से संतुष्ट रहते थे।
आज हमारे पास बड़ी नौकरियाँ हैं, आलीशान घर हैं, गाड़ियाँ हैं, मोबाइल हैं
और दुनिया की हर जानकारी हमारी उँगलियों पर है। फिर भी तनाव, अकेला.
पन और बेचैनी पहले से कहीं अधिक क्यों है?
""खुशियों का पता"" केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि हर उस इंसान का आईना
है जिसने सफलता तो पा ली, लेकिन सुकून कहीं पीछे छोड़ दिया।
यह कहानी आपको गाँव की उन गलियों में ले जाएगी जहाँ रिश्ते दिल से
बनते थे, और फिर महानगर की उस भीड़ में, जहाँ हजारों लोगों के बीच भी
इंसान अकेला रह जाता है।
शायद इस सफर के अंत में आपको भी खुशियों का असली पता मिल जाए।"
जब गाँव में कच्चे घर थे, आमदनी कम थी, बिजली कभी-कभी आती थी,
और जीवन सुविधाओं से बहुत दूर था...तब लोग फिर भी हँसते थे, साथ
बैठते थे और मन से संतुष्ट रहते थे।
आज हमारे पास बड़ी नौकरियाँ हैं, आलीशान घर हैं, गाड़ियाँ हैं, मोबाइल हैं
और दुनिया की हर जानकारी हमारी उँगलियों पर है। फिर भी तनाव, अकेला.
पन और बेचैनी पहले से कहीं अधिक क्यों है?
""खुशियों का पता"" केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि हर उस इंसान का आईना
है जिसने सफलता तो पा ली, लेकिन सुकून कहीं पीछे छोड़ दिया।
यह कहानी आपको गाँव की उन गलियों में ले जाएगी जहाँ रिश्ते दिल से
बनते थे, और फिर महानगर की उस भीड़ में, जहाँ हजारों लोगों के बीच भी
इंसान अकेला रह जाता है।
शायद इस सफर के अंत में आपको भी खुशियों का असली पता मिल जाए।"
Reader Reviews (0)
No reviews yet. Be the first to write one!
Share Your Thoughts
Your personal identity metrics remain protected inside our system parameters.