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Alpviram - Kavya Sangrah
199.00
| SKU Code | Book230612C |
| ISBN | 9789364269872 |
| Pages | 116 |
| Language | — |
| Genre | — |
| Book Size | 5*8 |
Synopsis
कवि गंभीरता के जिस धरातल पर खड़े होकर वह इस संसार को देख रहा है वो अनायास ही अवतरित हुआ नहीं लगता । ज़ाहिर है इसके पीछे वर्षों की पीड़ा है जो साधना का कार्य करती रही है । कविताई क्रांति की अभिव्यक्ति में उसने अपने स्वाभाविक भीतरी संघर्ष को ही माध्यम बनाया है सामान्य विश्वासों और अक़ीदत के बरअक्स उसके भीतर एक जाग्रत ज़हिन है । इस संग्रह में नया कहने की छटपटाहट है जो एक अच्छे कवि की पूंजी होती है । कवि के पास शाब्दिक चालाकियाँ और तरकीबी कसरतें नहीं हैं और ना ही शब्दों पर हावी होते प्रतीक हैं जो अक्सर शब्दों की आंतरिक आस्था पर चोट पहुंचाते हैं । भावनाओं की वृत्ति महसूस होते हुए भी वो आंतरिक पीड़ाओं के विवेचन में बाहरी परिस्थितियों के कारणों की तलाश में बड़ी शिद्दत से प्रयासरत हैं । इन प्रयासों का स्वागत केवल एक नवागंतुक कवि के आधार पर ही नहीं है बल्कि परिलक्षित होती उस दृष्टि के कारण भी है जो दूर क्षितिज तक अपना विस्तार पाने की क्षमता रखती है । उसका आत्मविश्वास चमत्कृत करने के साथ साथ कई उम्मीदें भी जगाता है जिन उम्मीदों पर आज तक की कविता की उमंगें ठहरी हुई हैं ।
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