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Vandana lama
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Vandana lama

"मेरा नाम वंदना लामा है। मैं देहरादून, उत्तराखंड की रहने वाली हूं और डाकघर में कार्यरत हूँ। मुझे जीवन के अनुभवों, मानवीय भावनाओं और रिश्तों को शब्दों में पिरोना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि हर इंसान के जीवन में कुछ ऐसी कहानी होती हैं, जिन्हें वह चाहकर भी किसी से कह नहीं पाता। कभी रिश्तों में मिला दर्द, कभी टूटता विश्वास और कभी अपनों से बिछड़ने का दुख इंसान को भीतर तक बदल देता है।
‘अधूरी रिमझिम’ मेरे लिए सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि भावनाओं और जीवन के अनुभवों को शब्दों में व्यक्त करने का एक प्रयास है। इस कहानी के माध्यम से मैंने रिश्तों की उलझनों, जीवन के संघर्षों और उन भावनाओं को सामने रखने की कोशिश की है, जिन्हें अक्सर लोग अपने मन में ही दबाकर रखते हैं। मेरी कोशिश है कि इस पुस्तक को पढ़ते हुए पाठक कहीं न कहीं अपनी जिंदगी और अपने अनुभवों की झलक महसूस कर सकें। मेरा विश्वास है कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें क्यों न आई उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए।"

Debut Work: "अधूरी रिमझिम"

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Adhoori Rimjhim