Umashankar Gautam
उमाशंकर गौतम (जन्म: 2 जनवरी 2008) वर्तमान में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कला संकाय में हिंदी साहित्य से स्नातक के छात्र हैं। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के ऐतिहासिक मिश्रिख क्षेत्र के एक अत्यंत साधारण, संघर्षशील एवं ग्रामीण परिवेश से निकलकर, उन्होंने अपनी वैचारिक दृढ़ता और अद्वितीय लेखन के दम पर समकालीन साहित्य जगत में अपनी एक मज़बूत पहचान दर्ज की है। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े उमा शंकर की लेखनी में समाज के वंचित वर्ग की आवाज़, मानवीय सरोकार और सामाजिक न्याय के प्रति अटूट निष्ठा साफ झलकती है।
फुले, पेरियार और आंबेडकर के मानवीय और समतावादी दर्शन को अपना आदर्श मानने वाले उमाशंकर गौतम, एक 'जाति-मुक्त भारत' और समतामूलक समाज के प्रबल पैरोकार हैं। वे एक ऐसे भारत की परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए प्रयासरत हैं, जहाँ जाति और धर्म की संकीर्ण दीवारों से ऊपर उठकर राष्ट्र में 'मानवीय बंधुता' और सौहार्द का संचार हो।
भारतीय संविधान, सामाजिक समानता, दर्शन और न्याय जैसे विषयों में गहन रुचि रखने वाले उमाशंकर गौतम की रचनाओं में यथार्थ, दार्शनिकता, आधुनिक समाज की ज़मीनी हकीकत और संवेदनशीलता का एक अनूठा संतुलन मिलता है। 'BHU वाली पायल: इश्क और अधूरा इंकलाब' उनकी प्रथम कृति है, जिसके माध्यम से उन्होंने न केवल छात्र जीवन की एक संवेदनात्मक दास्तां कही है, बल्कि अपने प्रगतिशील विचारों को पूरी ईमानदारी के साथ पाठकों के सम्मुख रखा है।
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