Om Prakash Agrwal
"मैं ओमप्रकाश अग्रवाल उर्फ़ 'क़दम जयपुरी' मूल रूप से इंजीनियरिंग स्नातक हूँ। 37 वर्ष निजी उद्योगों में कार्यरत रहने के पश्चात सेवानिवृत्त हुआ।
मुशायरे सुनने का शौक मुझे विद्यार्थी काल से रहा।
प्रारंभ में शेरों के बहर और मापनी यानी वज़्न का कुछ पता नहीं था। फिल्म के गीत की धुन गुनगुना कर कुछ लिख लिया करता था।
सन 2018 से समूहों की फ़िलबदीह पर लिखते समय पता चला कि मापनी और बहर भी कोई चीज़ होती है और बिना इसके समझे ग़ज़ल नहीं कही जा सकती है।
गूगल सर्च के माध्यम से कई अदीबों के ग़ज़ल के विभिन्न पहलुओं पर आलेख पढ़े और समझे जैसे शेर क्या और ग़ज़ल क्या है। यूँ तो ग़ज़ल एक अथाह सागर है जिसकी एक बूँद के बराबर भी नहीं हूँ मैं।
प्रयासरत हूँ कि मैं भी ग़ज़ल कहूँ और इसी प्रयास में
मेरा यह प्रथम ग़ज़ल-संग्रह 'रोते गुल और हँसते ख़ार' आपके समक्ष प्रस्तुत है।
उर्दू मेरी मातृभाषा नहीं है लेकिन मेरी प्रिय है और जिन शब्दों का प्रयोग किया है वह गूगल के सौजन्य से संभव हुआ है। हो सकता है कहीं कुछ ग़लतियाँ हों उनके लिए हृदयतल से क्षमा प्रार्थी हूँ।
इस उम्मीद के साथ कि आप का स्नेह और आशीर्वाद मिलेगा
आपका
ओमप्रकाश अग्रवाल
क़दम जयपुरी"