BOOKSCAMEL Premium Bookstore
Publish Now
Irshad Rahi
Featured Profile

Irshad Rahi

जब मैंने यह किताब लिखना शुरू की तो मेरे पास कोई बड़ा मकसद, कोई नाम या शोहरत की कोई ख्वाहिश नहीं थी, बस एक बेचैन दिल था जो हर दर्द को महसूस करता था। यह किताब उस बेचौनी की आवाज है। कभी यह कविताएं आंसुओं से लिखी गईं। कभी तनहाई की दीवारों से, कभी किसी औरत की आंखों से टपके आंसुओं से और कभी किसी मजदूर के थके हुए हाथों से। "झुकने से इनकार" सिर्फ एक शीर्षक नहीं है। यह लोगों का ऐलान है कि सच की राह कठिन हो सकती है पर बंद नहीं होती। यह किताब उन सबके लिए है जो इंसा. नियत पर यकीन रखते हैं, जो मोहब्बत को कमजोरी नहीं, ताकत समझते हैं।

Debut Work: "झुकने से इंकार"

Published Collection

1 Book Total
Jhukne Se Inkaar