Hanuman Prasad Gupta
हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ à¤à¤• अतà¥à¤¯à¤‚त अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¿à¤¤ और करà¥à¤®à¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ हैं, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार के à¤à¤• अधिकारी के रूप में अपनी सेवा पूरी निषà¥à¤ ा और ईमानदारी से निà¤à¤¾à¤ˆà¥¤ सेवा निवृतà¥à¤¤à¤¿ के बाद à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने समाज और लेखन के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ योगदान देना जारी रखा। उनका जीवन मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚, सेवा और करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯à¤¨à¤¿à¤·à¥à¤ ा का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है।
"वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त à¤à¤µà¤‚ सामाजिक दायितà¥à¤µ" उनकी पहली पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• है, जिसे उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने पूजà¥à¤¯ पिताशà¥à¤°à¥€ को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ किया है। यह कृति उनके जीवन अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚, नैतिक मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और समाज के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ उतà¥à¤¤à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¤à¥à¤µ की à¤à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¤• पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ है। लेखक का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ है कि उनके विचार और अनà¥à¤à¤µ नई पीढ़ी को दिशा और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करें।