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Dr. Nasim Ahmad
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Dr. Nasim Ahmad

डॉ नसीम अहमद पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से सरकारी विद्यालय में कार्यरत शिक्षक हैं एवं इस अवधि में शिक्षक प्रशिक्षक, वार्डन, प्रधानाध्यापक, पाठ्यपुस्तकलेखक, पत्रिका संपादक, प्रशिक्षण मॉडयुल निर्माता जैसी कई भूमिकाओं में कार्य किया है। पिछले कई वर्षों से उन्होंने झारखंड के ग्रामीण, अर्ध-शहरी एवं शहरी क्षेत्रों में पढ़ाया है, जहाँ हर बच्चा एक नई कहानी और हर दिन एक नया सबक लेकर आता है। डॉ अहमद को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने हेतु 2008 में प्रखण्ड स्तरीय श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार, 2010 में राज्य स्तरीय पुरस्कार, 2016 में जिला स्तरीय सम्मान, 2017 में राज्यपाल सम्मान, 2017 में राज्यपाल नवाचार पुरस्कार, 2019 में झारखण्ड सेवा रत्न अवार्ड, मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 2019 में राष्ट्रीय नवाचार अवार्ड, 2021 में ग्लोबल अवार्ड, 2022 में राष्ट्रीय सेवा रत्न अवार्ड, 2022 में देशभक्ति कविता श्रृंखला में वर्ल्ड रिकॉर्ड (इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड), 2025 में सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णन राष्ट्रीय अवार्ड, 2025 में मौलाना आजाद अवार्ड, 2026 में पदो और बढ़ो एवं उपस्थिति मोनिटरिंग में डायट रात द्वारा जिला नोडल प्रशस्ति पत्र एवं जे.सी.ई.आर.टी. द्वारा राज्य शिक्षक सम्मान 2026 आदि से सम्मानित किया गया है। उनकी यह धारणा है कि किताबें केवल कागज के पन्ने नहीं होते। उनमें विचार होते हैं, सपने होते हैं, अनुभव होते हैं और एक ऐसी दुनिया होती है, जो बच्चे की कल्पना को नई उडान देती है। लेकिन किताब तभी बोलती है, जब कोई बच्चा उसे पढ़ता है, समझता है और उसके शब्दों से अपना रिश्ता बनाता है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे तककिताब पहुँचाना जितना आवश्यक है, उससे कहीं अधिक आवश्यक है कि बच्चा किताब पढ़ सके,पढ़कर समझ सके और समझे हुए को अपने जीवन से जोड़ सके। पढ़ने की सहजता केवल भाषा सीखने का माध्यम नहीं है। यह बच्चे के आत्मविश्वास, कल्पनाशक्ति, अभिव्यक्ति और सीखने की पूरी यात्रा की आधारशिला है। उनके लिए "पढ़ो और बदो" केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चे और किताब के बीच दोस्ती कराने का एक प्रयास है। पढ़ो और बढ़ो का अंतिम लक्ष्य केवल बच्चों को पढ़ना सिखाना नहीं है। लक्ष्य है ऐसा वातावरण बनाना जहाँ हर बच्चा पढे. समझे, सोचे, पूछे, अभिव्यक्त करे और अपने सपनों की ओर बढ़े। जिस दिन हर बच्चा किताब से दोस्ती कर लेगा, उस दिन किताब सचमुच बोलने लगेगी।

Debut Work: "जब किताब बोलती है ...."

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School Aayega Har Bachcha
Jab Kitaab Bolti Hai